सामान्यतः एकाग्रता में कमी के कई कारण हो सकते हैं, मस्तिष्क के अगले भाग का कम या आवश्यकता से अधिक सक्रिय होना, न्यूरॉन्स का अत्यंत तीव्र होना, मानसिक ऊर्जा का तीव्रता से गति करना। ऐसे बच्चों में मानसिक ऊर्जा अच्छी होती है, किंतु उसे एकाग्र न कर पाने के कारण उसका सदुपयोग नहीं हो पाता।
– ऐसे बच्चों को हल्का, सुपाच्य, शाकाहारी, जल्दी पचने वाला भोजन, प्रातःकाल दही, मक्खन, सब्जियों और फलों का रस देना चाहिए, जिससे शरीर में पोषण संतुलित हो और जल संतृप्तता बनी रहे। न्यूरॉन्स के संतुलित एवं सक्रिय होने से स्मरणशक्ति, तर्कशक्ति, त्वरित बुद्धि अच्छी होती है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
– ऐसे बच्चों को प्राणायाम, पेट, फेफड़ों, ह्रदय, गले, आंख और मस्तिष्क का व्यायाम, मंत्र जरूर करना चाहिए, तथा प्राकृतिक मोती, पुखराज, तारा मंत्र, गणेश जी का मंत्र, वृहस्पति मंत्र जरूर करना चाहिए। डेल्टा, थीटा, और अल्फा मानसिक तरंगों का प्रयोग करना चाहिए।
