अति आत्मविश्वास – यह शब्द जितना सकारात्मक प्रतीत होता है, उतना ही इसके परिणाम उलझाव भरे हो सकते हैं। आत्मविश्वास एक आवश्यक गुण है, किंतु जब यह आवश्यकता से अधिक हो जाता है, तब यह विनम्रता, समझदारी और संतुलन को पीछे छोड़ देता है। कई बार यह स्थिति असफलता की ओर ले जाती है, क्योंकि वे किसी भी स्थिति को गंभीरता से लेना बंद कर देते हैं या स्वयं को हर परिस्थिति में श्रेष्ठ मानने लगते हैं।
लगभग पिछले 15 बर्षो से कॉर्पोरेट्स, व्यापारिक, अभिवावक ,विद्यार्थियों की समस्याओ को समझने और कई विभिन्न क्षेत्रो के बिशेषज्ञो (जिनमें डाक्टर्स, सर्जन, मनोचिकित्सक, फिजियोथेरिपिस्ट, रेडियोलाजिस्ट, आर्थोपेडिक्स, डेन्टिस्ट, आर्युवेदिक, होम्योपैथिक) प्राणिक हीलर, आई आई टियन्स, कम्प्यूटर इंजीनियर, आई आई एम और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स, कुण्डलिनी योग गुरु, अष्टांग योग गुरु, हठ योग गुरु, प्राणायाम बिशेषज्ञ, रंग चिकित्सा बिशेषज्ञ, मंत्र बिशेषज्ञ, रत्न बिशेषज्ञ, ज्योतिष विज्ञान बिशेषज्ञ, वास्तु बिशेषज्ञ, आहार बिशेषज्ञ से इन प्रश्नों के समाधान में सहयोग लिया गया तथा इसे इतना सहज बनाने का प्रयास किया गया जिससे हर व्यक्ति इसका उपयोग कर सक। समस्याग्रस्त लगभग हर व्यक्ति और विद्यार्थी है, किन्तु वो हर किसी से अपनी समस्या बता भी नही सकता, अधिकांशतः ये भी देखा गया है कि व्यक्ति जानता ही नही कि उसे समस्या भी है वो इसे सामान्यतः लेता है, परेशानी तब होती है जब समस्या बड़ी हो जाती है, तब वह खोजता है कि समाधान कैसे करें, इसी कारण इन समस्याओं का बिशेषज्ञों द्वारा मूल आधार जानना और उसका कई प्रकार से निदान करने का प्रयास किया गया है।
